गुरुवार, 16 जून 2011

ताजो तख्त नहीं,
मगर दिल में शहंशाह की हिम्मत है.
हर कदम पर जूझते हुए आगे बढा हूँ,
हर चीज़ को पाने के लिए लड़ा हूँ,
आज जो कुछ भी हूँ,
खुद की बदौलत हूँ,
खुद के हौंसले से,
मेरे लिये मुश्किल का अर्थ है मुकाबला.
डर!
ये किस चिडिया का नाम है????
मेरे सामने तो सिर्फ मंजिलें हैं,
सिर्फ मुकाम हैं.
देखना,
ज़िन्दगी की शाम मे मेरे चेहरे पे झुर्रियां होंगी,
और
आँखों मे
नई सुबह की रोशनी,
और मैं कहूँगा-
सिर्फ जिंदा नहीं रहा मैं,
ज़िन्दगी जी है मैंने
अपनी शर्तों पर

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